Hindi Poetry

Gulzar – Tanha


तन्हा

कहाँ छुपा दी है रात तूने
कहाँ छुपाये है तूने अपने गुलाबी हाथों के ठन्डे फाये
कहाँ है तेरे लबों के चेहरे
कहाँ है तू आज – तू कहाँ है ?

ये मेरे बिस्तर पे कैसा सन्नाटा सो रहा है ?