Javed Akhtar – Barson ki rasmo raah thi, ek roz usne tod di
बरसों की रस्मो-राह थी इक रोज़ उसने तोड़ दी
हुशियार हम भी कम नहीं, उम्मीद हमने छोड़ दी
गिरहें पड़ी हैं किस तरह, ये बात है कुछ इस तरह
वो डोर टूटी बारहा, हर बार हमने जोड़ दी
उसने कहा कैसे हो तुम, बस मैंने लब खोले ही थे
और बात दुनिया की तरफ़ जल्दी-से उसने मोड़ दी
वो चाहता है सब कहें, सरकार तो बेऐब हैं
जो देख पाए ऐब वो हर आँख उसने फोड़ दी
थोड़ी-सी पाई थी ख़ुशी तो सो गई थी ज़िंदगी
ऐ दर्द तेरा शुक्रिया, जो इस तरह झंझोड़ दी