Faiz Ahmed Faiz – Sarode shabana 2

नीम शब, चांद, ख़ुद-फ़रामोशी महफ़िले-हस्ती-बूद वीरां है पैकरे-इल्तिजा है ख़ामोशी बज़मे-अंजुम फ़सुरदा-सामां है आबशारे-सुकूत जारी है चार सू बेख़ुदी सी

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