Ramdhari Singh Dinkar – Nirakaar eeshwar
निराकार ईश्वर
हर चीज, जो खूबसूरत है,
किसी-न-किसी देह में है;
सुन्दरता शरीर पाकर हँसती है,
और जान हमेशा लहू और मांस में बसती है ।
यहाँ तक कि जो स्वप्न हमें बहुत प्यारे लगते हैं,
वे भी किसी शरीर को ही देखकर जगते हैं।
और ईश्वर ?
ईश्वर को अगर देह नहीं हो,
तो इच्छा, भावना, बल और प्रताप
वह कहाँ से लायेगा?
क्या तुम समझते हो कि ईश्वर गूँगा है ?
मगर, वह निराकार हुआ तो बोल भी कैसे पायेगा ?
क्योंकि ईश्वर जितना भी दुर्लभ हो,
समझा यह जाता है कि वह हमें प्यार करता है।
और चाहता है कि, हम सृष्टि के सिरमौर बनें,
यह बनें, वह बनें या कुछ और बनें।
गरचे, उसकी शान निराली है,
मगर, सव कहते हैं
कि ईश्वर प्रतापी और शक्तिशाली है।