Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Dil mein ab, yun tere bhoole huye gham aaye hain


दिल में अब, यूँ तिरे भूले हुए ग़म आते हैं

दिल में अब, यूँ तिरे भूले हुए ग़म आते हैं
जैसे बिछड़े हुये का’बे में सनम आते हैं

एक-इक कर के हुए जाते हैं तारे रौशन
मेरी मंज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते हैं

रक़्से-मय तेज़ करो, साज़ की लय तेज़ करो
सू-ए-मयख़ानः सफ़ीराने-हरम आते हैं

कुछ हमीं को नहीं एहसान उठाने का दिमाग़
वो तो जब आते हैं माइल-ब-करम आते हैं

और कुछ देर न गुज़रे शब-ए-फ़ुरक़त से कहो
दिल भी कम दुखता है, वो याद भी कम आते हैं

(सनम=मूर्तियाँ, रक़्से-मय=शराब का नाच,
सू-ए-मयख़ानः=मयख़ाने की तरफ़, सफ़ीराने-
हरम=मस्जिद के दूत, माइल-ब-करम=कृपा
करने को तैयार, शब-ए-फ़ुरक़त=विरह की रात)