Hindi Poetry

Javed Akhtar – Kal jahan deewar thi, hai aaj ek darr dekhiye


कल जहाँ दीवार थी, है आज इक दर देखिए
क्या समाई थी भला दीवाने के सर, देखिए

पुर-सुकूँ लगती है कितनी झील के पानी पे बत
पैरों की बेताबियाँ पानी के अंदर देखिए

छोड़कर जिसको गये थे आप कोई और था
अब मैं कोई और हूँ वापस तो आकर देखिए

छोटे-से घर में थे देखे ख्वाब महलों के कभी
और अब महलों में हैं तो ख्वाब में घर देखिए

ज़हने-इंसानी इधर, आफ़ाक़ की वुसअत उधर
एक मंज़र है यहाँ अंदर कि बाहर देखिए

अक्ल ये कहती है दुनिया मिलती है बाज़ार में
दिल मगर ये कहता है कुछ और बेहतर देखिए