Hindi Poetry

Javed Akhtar – Jab aayna koi dekho


जब आइना कोई देखो इक अजनबी देखो
कहाँ पे लाई है तुमको ये ज़िंदगी देखो

मुहब्बतों में कहाँ अपने वास्ते फ़ुर्सत
जिसे भी चाहो वो चाहे मिरी ख़ुशी देखो

जो हो सके तो ज़्यादा ही चाहना मुझको
कभी जो मेरी मुहब्बत में कुछ कमी देखो

जो दूर जाए तो ग़म है जो पास आए तो दर्द
न जाने क्या है वो कमबख़्त आदमी देखो

उजाला तो नहीं कह सकते इसको हम लेकिन
ज़रा-सी कम तो हुई है ये तीरगी देखो