Hindi Poetry

Javed Akhtar – Zindagi ki aandhi mein zehan ka sazar tanha


ज़िंदगी की आँधी में ज़हन का शजर तन्हा
तुमसे कुछ सहारा था, आज हूँ मगर तन्हा

ज़ख़्म-ख़ुर्दा लम्हों को मसलेहत संभाले है
अनगिनत मरीज़ों में एक चारागर तन्हा

बूँद जब थी बादल में ज़िंदगी थी हलचल में
क़ैद अब सदफ़ में है बनके है गुहर तन्हा

तुम फ़ुज़ूल बातों का दिल पे बोझ मत लेना
हम तो ख़ैर कर लेंगे ज़िंदगी बसर तन्हा

इक खिलौना जोगी से खो गया था बचपन में
ढूँढता फिरा उसको वो नगर-नगर तन्हा

झुटपुटे का आलम है जाने कौन आदम है
इक लहद पे रोता है मुँह को ढाँपकर तन्हा