Gulzar – Yeh subah saans legi aur baadbaan khulega
ये सुबह सांस लेगी और बादबाँ खुलेगा
पलकें उठाओ जानम ये आसमां खुलेगा
आँखों के नीचे थोड़ा सा काजल ढलक गया है
पलकें उठाओ ख्वाब का आँचल अटक गया है
पलकों से बाँधा सपना जाने कहाँ खुलेगा
ये सुबह सांस लेगी और बादबाँ खुलेगा
आँखों से नींद खोलो, दरिया रुके हुए हैं
और पर्वतों पे कब से बादल झुके हुए हैं
ये रात बंद हो तो दिन का समां खुलेगा
ये सुबह सांस लेगी और बादबाँ खुलेगा