Hindi Poetry

Gulzar – Ghapla hai bhai


घपला है भई
घपला है…हो
घपला है, घपला है, घपला है जी घपला है
ह -अग बायी घपला है, घपला है जी घपला

छोड़ गजापत पकड़ पूंछ का घपला है
साधू-संत की दाढ़ी-मूंछ का घपला है
आटे में घपला, बाटे में घपला…या
घपला है…

आटे में घपला जी बाटे में घपला
जी रे जी रे…
रेल में घपला जी तेल में घपला
जी रे जी रे…
आटे में घपला जी बाटे में घपला
रेल में घपला जी तेल में घपला
एल.आई.सी. बैंक में घपला
जीप में घपला, टैंक में घपला
जी रे…जी रे…
फ़ौज़ों के बूटों से लेकर बंदूको में, घपला है
तीन करोड़ के नोट-भरे इन संदूकों में, घपला है
अरे हे…
पौडर फौडर भाई दामोदर, घपला है
भाई भतीजा, पर्मिट आर्डर, घपला है
काले में घपला, हवाले में घपला…है
जी रे जी रे…

हूं दुकानें बेचीं तो बिक गए साथ गवर्नर
गाय-भैंस का चारा खा गए यार मिनिस्टर
अदल-बदल कर दल बदल-बदलकर लड़ते हैं
हू तू तू तू, हू तू तू तू…
अरे हाथ कहीं और पाँव कहीं पर पड़ते हैं
हू तू तू तू…
अदल-बदल कर दल बदल-बदलकर लड़ते हैं
अरे हाथ कहीं और पाँव कहीं पर पड़ते हैं
अरे हे हे…
डॉलर-वोलर भाई दमोदर, घपला है
सारा सोच के देख सरासर, घपला है
अर्ज़ी में घपला, मर्ज़ी में घपला
अई ग…

घपला है घपला है…
हे अग बाई घपला है, घपला है, जी घपला
घपला है भई घपला है भई घपला है भई
देवा रे ए…ओ…ओ
लोग बेचारे तिन तिन तारे
तिन तिन तारे लोग बेचारे
तिल-तिल मरनेवाले, तिल-तिल तरने वाले
कीड़ों और मकोड़ों जैसे लोग बेचारे…
तिन तिन तारे…
तिन तिन तारे हे हे…

घिसते घिसटते फट जाते हैं
जूतों जैसे लोग बेचारे
पैरों में पहने जाते हैं, जलसे और जलूसों में
संगीनों से सिले सिपाही, वर्दी के मलबूसों में
गोली से जो फट जाते
चिथड़ों जैसे फेंक दिए जाते हैं सारे
तिन तिन तारे लोग बेचारे