Hindi Poetry

Gulzar – Yeh gol sikke


हर एक पुश्त की औकात उसकी लिखी है
बचाके रखना तुम..
ये गोल सिक्के, दमकते हुए खनकते हुए
किसी पे मोहरा हुआ एक राजा का चेहरा
किसी पे मोहरी हुई एक रानी की तस्वीर
हर इक की पुश्त पे औक़ात उसकी लिखी है
ये हाथों-हाथ लियॆ जाते है जहाँ जायें
बचाके रखना तुम अपनी खुदी के चेहरे को
ये मिट गया तो गिनाएंगे खोटे सिक्कों में