Hindi Poetry Gulzar – Fir koi nazam kahein October 15, 2020 rhymecloud फिर कोई नज़्म कहें आओ फिर नज़्म कहें फिर किसी दर्द को सहलाकर सुजा ले आँखें फिर किसी दुखती हुई रग में छुपा दें नश्तर या किसी भूली हुई राह पे मुड़कर एक बार नाम लेकर किसी हमनाम को आवाज़ ही दें लें फिर कोई नज़्म कहें