Atal Bihari Vajpayee – Tez raftaar se daudti busen
तेज रफ्तार से दौड़ती बसें,
बसों के पीछे भागते लोग,
बच्चे सम्हालती औरतें,
सड़कों पर इतनी धूल उड़ती है
कि मुझे कुछ दिखाई नहीं देता ।
मैं सोचने लगता हूँ ।
पुरखे सोचने के लिए आँखें बन्द करते थे,
मै आँखें बन्द होने पर सोचता हूँ ।
बसें ठिकानों पर क्यों नहीं ठहरतीं ?
लोग लाइनों में क्यों नहीं लगते ?
आखिर यह भागदौड़ कब तक चलेगी ?
देश की राजधानी में,
संसद के सामने,
धूल कब तक उड़ेगी ?
मेरी आँखें बन्द हैं,
मुझे कुछ दिखाई नहीं देता ।
मैं सोचने लगता हूँ ।