Hindi Poetry

Suryakant Tripathi Nirala – Yeh dukh ke din kaate hain jisne


ये दुख के दिन काटे हैं जिसने

ये दुख के दिन
काटे हैं जिसने
गिन गिनकर
पल-छिन, तिन-तिन।

आँसू की लड़ के मोती के
हार पिरोये,
गले डालकर प्रियतम के
लखने को शशिमुख
दुःखनिशा में
उज्ज्वल अमलिन।