Faiz Ahmed Faiz – Siyaasi leader ke naam
सियासी लीडर के नाम सालहा-साल ये बे-आसरा, जकड़े हुए हाथ रात के सख़्तो-सियह सीने में पैवस्त रहे जिस तरह तिनका
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सियासी लीडर के नाम सालहा-साल ये बे-आसरा, जकड़े हुए हाथ रात के सख़्तो-सियह सीने में पैवस्त रहे जिस तरह तिनका
Read Moreरंग पैराहन का, ख़ुशबू जुल्फ़ लहराने का नाम रंग पैराहन का, ख़ुशबू जुल्फ़ लहराने का नाम मौसमे गुल है तुम्हारे
Read Moreबरसों बाद मिले तुम हमको बरसों बाद मिले तुम हमको आओ जरा बिचारें, आज क्या है कि देख कौम को
Read Moreहो कहाँ अग्निधर्मा नवीन ऋषियो कहता हूँ¸ ओ मखमल–भोगियो। श्रवण खोलो¸ रूक सुनो¸ विकल यह नाद कहां से आता है।
Read Moreक़र्जे-निगाहे-यार अदा कर चुके हैं हम क़र्जे-निगाहे-यार अदा कर चुके हैं हम सब कुछ निसारे-राहे वफ़ा कर चुके हैं हम
Read Moreऐ दिले-बेताब, ठहर तीरगी है कि उंमडती ही चली आती है शब की रग-रग से लहू फूट रहा हो जैसे
Read Moreशफ़क़ की राख में जल-बुझ गया सितारः-ए-शाम शफ़क़ की राख में जल-बुझ गया सितारः-ए-शाम, शबे-फ़िराक़ के गेसू फ़ज़ा में लहराए
Read Moreचांद का कुर्ता हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला, ‘‘सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा
Read Moreरोटी और स्वाधीनता (अय ताइरे-लाहूती ! उस रिज़्क से मौत अच्छी, जिस रिज़्क से आती हो परवाज़ में कोताही।-इक़बाल) (1)
Read Moreमिर्च का मज़ा एक काबुली वाले की कहते हैं लोग कहानी, लाल मिर्च को देख गया भर उसके मुँह में
Read Moreध्वज-वंदना नमो, नमो, नमो… नमो स्वतंत्र भारत की ध्वजा, नमो, नमो! नमो नगाधिराज-शृंग की विहारिणी! नमो अनंत सौख्य-शक्ति-शील-धारिणी! प्रणय-प्रसारिणी, नमो
Read Moreजियो जियो अय हिन्दुस्तान जाग रहे हम वीर जवान, जियो जियो अय हिन्दुस्तान ! हम प्रभात की नई किरण हैं,
Read Moreवहीं हैं, दिल के क़राइन तमाम कहते हैं वहीं हैं, दिल के क़राइन तमाम कहते हैं वो इक ख़लिश कि
Read Moreयादे-ग़ज़ालचश्मां, ज़िक्रे-समनइज़ारां यादे-ग़ज़ालचश्मां, ज़िक्रे-समनइज़ारां जब चाहा कर लिया है कुंजे-क़फ़स बहारां आंखों में दर्दमंदी, होंठों पे उज़्रख़्वाही जानाना-वार आई शामे-फ़िराक़े-यारां
Read Moreतुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं किसी बहाने तुम्हें याद
Read Moreएक पत्र मैं चरणॊं से लिपट रहा था, सिर से मुझे लगाया क्यों? पूजा का साहित्य पुजारी पर इस भाँति
Read Moreतन्तुकार भू पर कटु रव कर्कश, अपार, ऊपर अम्बर में धूम, क्षार । श्रमियों का कर शोषण, विनाश, चिमनियाँ छोड़तीं
Read Moreसर्ग-संदेश देशों में यदि सर्वोच्च देश बनना चाहो, पहले, सबसे बढ़ कर, भारत को प्यार करो । है चकित विश्व
Read Moreबरगद निश्चिन्त चारुजल ताल-तीर है खड़ा एक बरगद गम्भीर, पत्ते-पत्ते में सघन, श्यामद्युति हरियाली । डोलता दिवस भर छवि बिखेर,
Read Moreउर्वशी काव्य की समाप्ति (उर्वशी काव्य के पूर्ण होने पर पंत जी को लिखा गया एक पत्र) मान्यवर ! आप
Read Moreप्रण-भंग विश्व-विभव की अमर वेलि पर फूलों-सा खिलना तेरा। शक्ति-यान पर चढ़कर वह उन्नति-रवि से मिलना तेरा। भारत ! क्रूर
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