Javed Akhtar – Har khushi mein koi kmi si hai
हर ख़ुशी में कोई कमी-सी है हँसती आँखों में भी नमी-सी है दिन भी चुप चाप सर झुकाये था रात
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हर ख़ुशी में कोई कमी-सी है हँसती आँखों में भी नमी-सी है दिन भी चुप चाप सर झुकाये था रात
Read Moreन अपने ज़ब्त को रुस्वा करो सता के मुझे ख़ुदा के वास्ते देखो न मुस्कुरा के मुझे सिवाए दाग़ मिला
Read Moreनिगाह-ए-क़हर होगी या मोहब्बत की नज़र होगी मज़ा दे जाएगी दिल से अगर ऐ सीम-बर होगी तुम्हें जल्दी है क्या
Read Moreअब रहा क्या है जो अब आए हैं आने वाले जान पर खेल चुके जान से जाने वाले ये न
Read Moreये बुत फिर अब के बहुत सर उठा के बैठे हैं ख़ुदा के बंदों को अपना बना के बैठे हैं
Read Moreख़िज़ाँ जब तक चली जाती नहीं है चमन वालों को नींद आती नहीं है जफ़ा जब तक कि चौंकाती नहीं
Read Moreकहाँ आया है दीवानों को तेरा कुछ क़रार अब तक तिरे वादे पे बैठे कर रहे हैं इंतिज़ार अब तक
Read Moreएक नहीं दो नहीं करो बीसों समझौते, पर स्वतन्त्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा। अगणित बलिदानो से अर्जित यह स्वतन्त्रता,
Read Moreगीत नया गाता हूँ टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर पत्थर की छाती मे उग आया नव अंकुर झरे
Read Moreनए मील का पत्थर पार हुआ। कितने पत्थर शेष न कोई जानता? अन्तिमनए मील का पत्थर पार हुआ। कितने पत्थर
Read Moreहिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय॥ मैं शंकर का वह क्रोधानल कर सकता जगती क्षार क्षार
Read Moreअत्याचारी ने आज पुनः ललकारा, अन्यायी का चलता है, दमन-दुधारा। आँखों के आगे सत्य मिटा जाता है, भारतमाता का शीश
Read Moreजो बरसों तक सड़े जेल में, उनकी याद करें। जो फाँसी पर चढ़े खेल में, उनकी याद करें। याद करें
Read Moreजीवन की ढलने लगी सांझ उमर घट गई डगर कट गई जीवन की ढलने लगी सांझ। बदले हैं अर्थ शब्द
Read Moreक्या खोया, क्या पाया जग में मिलते और बिछुड़ते मग में मुझे किसी से नहीं शिकायत यद्यपि छला गया पग-पग
Read Moreतेज रफ्तार से दौड़ती बसें, बसों के पीछे भागते लोग, बच्चे सम्हालती औरतें, सड़कों पर इतनी धूल उड़ती है कि
Read Moreआसमान में बिजली ज़्यादा, घर में बिजली काम। टेलीफ़ोन घूमते जाओ, ज़्यादातर गुमसुम॥ बर्फ ढकीं पर्वतमालाएं, नदियां, झरने, जंगल। किन्नरियों
Read Moreएक बरस बीत गया झुलासाता जेठ मास शरद चांदनी उदास सिसकी भरते सावन का अंतर्घट रीत गया एक बरस बीत
Read Moreगगन में लहरता है भगवा हमारा ॥ गगन मे लहरता है भगवा हमारा । घिरे घोर घन दासताँ के भयंकर
Read Moreयह परम्परा का प्रवाह है, कभी न खण्डित होगा। पुत्रों के बल पर ही मां का मस्तक मण्डित होगा। वह
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