Javed Akhtar – Jab aayna koi dekho
जब आइना कोई देखो इक अजनबी देखो कहाँ पे लाई है तुमको ये ज़िंदगी देखो मुहब्बतों में कहाँ अपने वास्ते
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जब आइना कोई देखो इक अजनबी देखो कहाँ पे लाई है तुमको ये ज़िंदगी देखो मुहब्बतों में कहाँ अपने वास्ते
Read Moreमुझे वो धुंध में लिपटी हुई मासूम सदियाँ याद आती हैं कि जब तुम हर जगह थे हर तरफ़ थे
Read Moreकितनी सदियों से ढूँढ़ती होंगी तुमको ये चाँदनी की आवज़ें पूर्णमासी की रात जंगल में नीले शीशम के पेड़ के
Read Moreसच तो ये है क़ुसूर अपना है चाँद को छूने की तमन्ना की आस्मां को ज़मीन पर माँगा फूल चाहा
Read Moreतेरी आँखें तेरी ठहरी हुई ग़मगीन-सी आँखें तेरी आँखों से ही तख़लीक़ हुई है सच्ची तेरी आँखों से ही तख़लीक़
Read Moreमिसाल इसकी कहाँ है कोई ज़माने में कि सारे खोने के ग़म पाए हमने पाने में वो शक्ल पिघली तो
Read Moreमुझको इतने से काम पे रख लो… जब भी सीने पे झूलता लॉकेट उल्टा हो जाए तो मैं हाथों से
Read Moreजीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो लोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो फिर मुक़र्रिर कोई
Read Moreयही हालात इब्तेदा से रहे लोग हमसे ख़फ़ा-ख़फ़ा-से रहे इन चिराग़ों में तेल ही कम था क्यों गिला हमको फिर
Read Moreतू किसी पे जाँ को निसार कर दे कि दिल को क़दमों में डाल दे कोई होगा तेरा यहाँ कभी
Read Moreरोज़गार के सौदों में जब भाव-ताव करता हूँ गानों की कीमत मांगता हूँ – सब नज्में आँख चुराती हैं और
Read Moreइन बूढ़े पहाड़ों पर, कुछ भी तो नहीं बदला सदियों से गिरी बर्फ़ें और उनपे बरसती हैं हर साल नई
Read Moreन जाने क्या था, जो कहना था आज मिल के तुझे तुझे मिला था मगर, जाने क्या कहा मैंने वो
Read Moreमैं कितनी सदियों से तक रहा हूँ ये कायनात और इसकी वुस्अत तमाम हैरत तमाम हैरत ये क्या तमाशा ये
Read Moreबज़ाहिर क्या है जो हासिल नहीं है मगर ये तो मिरी मंज़ल नहीं है ये तोदा रेत का है, बीच
Read Moreयक़ीन का अगर कोई भी सिलसिला नहीं रहा तो शुक्र कीजिए, कि अब कोई गिला नहीं रहा न हिज्र है
Read Moreकिसी का ग़म सुन के मेरी पलकों पे एक आँसू जो आ गया है ये आँसू क्या है ये आँसू
Read Moreहमने ढूँढे भी तो ढूँढे हैं सहारे कैसे इन सराबों पे कोई उम्र गुज़ारे कैसे हाथ को हाथ नहीं सूझे,
Read Moreकल जहाँ दीवार थी, है आज इक दर देखिए क्या समाई थी भला दीवाने के सर, देखिए पुर-सुकूँ लगती है
Read Moreमिरे मुख़ालिफ़ ने चाल चल दी है और अब मेरी चाल के इंतेज़ार में है मगर मैं कब से सæफेद
Read Moreकभी-कभी मैं ये सोचता हूँ कि मुझको तेरी तलाश क्यों है कि जब हैं सारे ही तार टूटे तो साज़
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