Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Fund ke liye sifaarish


फ़ंड के लिए सिफ़ारिस

फ़ंडवालों से गुज़ारिश है कि कुछ सदका-ए-ज़र
सायले-मुहव्वल-ए-बाला को मिले बारे-दिगर
पोच लिखते हैं जो वो लिखते हैं तसलीम मगर
उनकी औलाद व अज़्ज़ा को नहीं उसकी ख़बर
आल बेहूदा-नवीसां के लिए बाने-जूई
टालसटाय के घराने से अहम कम तो नहीं

(सदका-ए-ज़र=धन का दान, सायले-मुहव्वल-
ए-बाला=ज़रूरतमन्द, बारे-दिगर=दोबारा, पोच=
घटिया, अज़्ज़ा=संतान, बेहूदा-नवीसां=घटिया
लेखक, बाने-जूई=भूख का कारन)