Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Phool murjha gye hain saare


फूल मुर्झा गये हैं सारे

फूल मुर्झा गये हैं सारे
थमते नहीं हैं आसमां के आंसू
शमएं बेनूर हो गई हैं
आईने चूर हो गए हैं
साज़ सब बज के खो गए हैं
पायलें बुझ के सो गई हैं
और इन बादलों के पीछे
दूर इस रात का दुलारा
दर्द का सितारा
टिमटिमा रहा है
झनझना रहा है
मुस्कुरा रहा है

लन्दन, १९७८