Hindi Poetry Gulzar – Mausam November 20, 2020 rhymecloud मौसम बर्फ पिघलेगी जब पहाड़ों से और वादी से कोहरा सिमटेगा बीज अंगड़ाई लेके जागेंगे अपनी अलसाई आँखें खोलेंगे सब्ज़ा बह निकलेगा ढलानों पर गौर से देखना बहारों में पिछले मौसम के भी निशाँ होंगे कोपलों की उदास आँखों में आँसुओं की नमी बची होगी