Hindi Poetry

Javed Akhtar – Dard apnata hai paraaye kaun


दर्द अपनाता है पराए कौन
कौन सुनता है और सुनाए कौन

कौन दोहराए फिर वही बातें
ग़म अभी सोया है, जगाए कौन

अब सुकूँ है तो भूलने में है
लेकिन उस शख्स को भुलाए कौन

वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं
कौन दुख झेले, आज़माए कौन

आज फिर दिल है कुछ उदास-उदास
देखिए आज याद आए कौन