Hindi Poetry

Javed Akhtar – Humne dhoondhe bhi toh dhoonde hai sahaare kaise


हमने ढूँढे भी तो ढूँढे हैं सहारे कैसे
इन सराबों पे कोई उम्र गुज़ारे कैसे

हाथ को हाथ नहीं सूझे, वो तारीकी थी
आ गये हाथ में क्या जाने सितारे कैसे

हर तरफ़ शोर उसी नाम का है दुनिया में
कोई उसको जो पुकारे तो पुकारे कैसे

दिल बुझा जितने थे अरमान सभी ख़ाक हुए
राख में फिर ये चमकते हैं शरारे कैसे

न तो दम लेती है तू और न हवा थमती है
ज़िंन्दगी ज़ुल्फ़ तिरी कोई सँवारे कैसे