Hindi Poetry

Javed Akhtar – Khwaab ke gaon mein ple hain hum


ख़्वाब के गाँव में पले हैं हम
पानी छलनी में ले चले हैं हम

छाछ फूंकें कि अपने बचपन में
दूध से किस तरह जले हैं हम

ख़ुद हैं अपने सफ़र की दुश्वारी
अपने पैरों के आबले हैं हम

तू तो मत कह हमें बुरा दुनिया
तू ने ढाला है और ढले हैं हम

क्यूँ हैं कब तक हैं किस की ख़ातिर हैं
बड़े संजीदा मसअले हैं हम