Hindi Poetry

Javed Akhtar – Yahi halaat


यही हालात इब्तेदा से रहे
लोग हमसे ख़फ़ा-ख़फ़ा-से रहे

इन चिराग़ों में तेल ही कम था
क्यों गिला हमको फिर हवा से रहे

बहस, शतरंज, शेर, मौसीक़ी
तुम नहीं थे तो ये दिलासे रहे

ज़िंदगी की शराब माँगते हो
हमको देखो, कि पीके प्यासे रहे

उसके बंदों को देखकर कहिए
हमको उम्मीद क्या ख़ुदा से रहे