Hindi Poetry Ramdhari Singh Dinkar – Poorvabhaas September 3, 2022 rhymecloud पूर्वाभास हाय ! विभव के उस पद में नियति-भीषिका की मुसकान जान न सकी भोग में भूली- सी तेरी प्यारी सन्तान। सुन न सका कोई भी उसका छिपा हुआ वह ध्वंसक राग- ‘‘हरे-भरे, डहडहे विपिन में शीघ्र लगाऊँगी मैं आग।’’