Hindi Poetry

Suryakant Tripathi Nirala – Tan man dhan vaare hain


तन, मन, धन वारे हैं

तन, मन, धन वारे हैं;

परम-रमण, पाप-शमन,
स्थावर-जंगम-जीवन;
उद्दीपन, सन्दीपन,
सुनयन रतनारे हैं।

उनके वर रहे अमर
स्वर्ग-धरा पर संचर,
अक्षर-अक्षर अक्षर,
असुर अमित मारे हैं।

दूर हुआ दुरित, दोष,
गूंज है विजय-घोष,
भक्तों के आशुतोष,
नभ-नभ के तारे हैं।