Suryakant Tripathi Nirala – Foote hain aamon mein bor
फूटे हैं आमों में बौर फूटे हैं आमों में बौर, भौंर वन-वन टूटे हैं। होली मची ठौर-ठौर, सभी बन्धन छूटे
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फूटे हैं आमों में बौर फूटे हैं आमों में बौर, भौंर वन-वन टूटे हैं। होली मची ठौर-ठौर, सभी बन्धन छूटे
Read Moreआज प्रथम गाई पिक पंचम आज प्रथम गाई पिक पंचम। गूंजा है मरु विपिन मनोरम। मस्त प्रवाह, कुसुम तरु फूले,
Read Moreतोड़ती पत्थर वह तोड़ती पत्थर; देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर- वह तोड़ती पत्थर। कोई न छायादार पेड़ वह
Read Moreउदबोधन गरज गरज घन अंधकार में गा अपने संगीत, बन्धु, वे बाधा-बन्ध-विहीन, आखों में नव जीवन की तू अंजन लगा
Read Moreतट पर नव वसन्त करता था वन की सैर जब किसी क्षीण-कटि तटिनी के तट तरुणी ने रक्खे थे अपने
Read Moreअलि की गूँज चली द्रुम कुँजों अलि की गूँज चली द्रुम कुँजों। मधु के फूटे अधर-अधर धर। भरकर मुदे प्रथम
Read Moreकौन फिर तुझको बरेगा कौन फिर तुझको बरेगा तू न जब उस पथ मरेगा? निखिल के शर शत्रु हनकर, क्षत
Read Moreतू दिगम्बर विश्व है घर तू दिगम्बर विश्व है घर ज्ञान तेरा सहज वर कर। शोकसारण करणकारण, तरणतारण विष्णु-शंकर। अमित
Read Moreखोले अमलिन जिस दिन खोले अमलिन जिस दिन, नयन विश्वजन के दिखी भारती की छबि, बिके लोग धन के। तन
Read Moreमुदे नयन, मिले प्राण मुदे नयन, मिले प्राण, हो गया निशावसान। जगते-जग के कलरव सोये, उर के उत्सव मन्द हुए
Read Moreजननी मोह की रजनी जननी मोह की रजनी पार कर गई अवनी। तोरण-तोरण साजे, मंगल-बाजे बाजे, जन-गण-जीवन राजे, महिलाएँ बनीठनीं।
Read Moreपथ पर बेमौत न मर पथ पर बेमौत न मर, श्रम कर तू विश्रम-कर। उठा उठा करद हाथ, दे दे
Read Moreकनक कसौटी पर कढ़ आया कनक कसौटी पर कढ़ आया स्वच्छ सलिल पर कर की छाया। मान गये जैसे सुनकर
Read Moreहुए पार द्वार-द्वार हुए पार द्वार-द्वार, कहीं मिला नहीं तार। विश्व के समाराधन हंसे देखकर उस क्षण, चेतन जनगण अचेत
Read Moreहरिण-नयन हरि ने छीने हैं हरिण-नयन हरि ने छीने हैं। पावन रँग रग-रग भीने हैं। जिते न-चहती माया महती, बनी
Read Moreसाध पुरी, फिरी धुरी साध पुरी, फिरी धुरी। छुटी गैल-छैल-छुरी। अपने वश हैं सपने, सुकर बने जो न बने, सीधे
Read Moreपतित हुआ हूँ भव से तार पतित हुआ हूँ भव से तार; दुस्तर दव से कर उद्धार। तू इंगित से
Read Moreपतित पावनी, गंगे पतित पावनी, गंगे! निर्मल-जल-कल-रंगे! कनकाचल-विमल-धुली, शत-जनपद-प्रगद-खुली, मदन-मद न कभी तुली लता-वारि-भ्रू-भंगे! सुर-नर-मुनि-असुर-प्रसर स्तव रव-बहु गीत-विहर जल धारा
Read Moreचरण गहे थे, मौन रहे थे चरण गहे थे, मौन रहे थे, विनय-वचन बहु-रचन कहे थे। भक्ति-आंसुओं पद पखार कर,
Read Moreविपद-भय-निवारण करेगा वही सुन विपद-भय-निवारण करेगा वही सुन, उसी का ज्ञान है, ध्यान है मान-गुन। वेग चल, वेग चल, आयु
Read Moreश्याम-श्यामा के युगल पद श्याम-श्यामा के युगल पद, कोकनद मन के विनिर्मद। हृदय के चन्दन सुखाशय, नयन के वन्दन निरामय,
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