Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Filistin ke liye – 1


फ़लिसतीन के लिए-२

(फ़लिसतीनी बच्चों के लिए लोरी)

मत रो बच्चे
रो रो के अभी
तेरे अंमी की आंख लगी है

मत रो बच्चे
कुछ ही पहले
तेरे अब्बा ने
अपने ग़म से रुख़सत ली है

मत रो बच्चे
तेरा भाई
अपने ख़्वाब की तितली पीछे
दूर कहीं परदेस गया है

मत रो बच्चे
तेरी बाजी का
डोला पराये देस गया है

मत रो बच्चे
तेरे आंगन में
मुर्दा सूरज नहला के गये हैं
चन्दरमा दफ़ना के गये हैं

मत रो बच्चे
गर तू रोयेगा तो ये सब
अंमी, अब्बा, बाजी, भाई
चांद और सूरज

और भी तुझको रुलवायेंगे
तू मुस्करायेगा तो शायद
सारे इक दिन भेस बदलकर
तुझसे खेलने लौट आयेंगे

बेरूत, १९८०