Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Manzilien Manzilien


गीत- मंज़िलें मंज़िलें

फ़िल्म : कसम उस वक़्त की

शौके-दीदार की मंज़िलें
हुस्ने-दिदार की मंज़िलें, प्यार की मंज़िलें
प्यार की बेपनह रात की मंज़िलें
कहकशानों की बारात की मंज़िलें

बलन्दी की, हिम्मत की, परवाज़ की
जोशे-परवाज़ की मंज़िलें
राज़ की मंज़िलें
ज़िन्दगी की कठिन राह की मंज़िलें
बलन्दी की, हिम्मत की, परवाज़ की मंज़िलें
जोशे-परवाज़ की मंज़िलें
राज़ की मंज़िलें

आन मिलने के दिन
फूल खिलने के दिन
वक़्त के घोर सागर में सुबह की
शाम की मंज़िलें
चाह की मंज़िलें
आस की, प्यास की
हसरते-यार की
प्यार की मंज़िलें
मंज़िलें, हुस्ने-आलम के गुलज़ार की मंज़िलें, मंज़िलें

मौज-दर-मौज ढलती हुई रात के दर्द की मंज़िलें
चांद-तारों के वीरान संसार की मंज़िलें

अपनी धरती के आबाद बाज़ार की मंज़िलें
हक के इरफ़ान की
नूरे-अनवार की
वस्ले-दिलदार की
कौलो-इकरार की मंज़िलें
मंज़िलें, मंज़िलें

(कहकशानों की=आकाश गंगा की, हक के
इरफ़ान=सत्य का ज्ञान)