Gulzar – Dil ka rasiya aur kahan hoga
दिल का रसिया और कहाँ होगा
इश्क की आग का धुआँ जहाँ होगा
पीड़ा पाले ग़म सहलाए
कैसे-कैसे जी बहलाए
बावरा है, भला मना कहाँ होगा…
रुखे-सूखे तिनके रखना
फूंकना और चिनगारियाँ चखना
भोगी है, जोगी ये, चैन कहाँ होगा…
Punjabi, Hindi Poetry and Lyrics
दिल का रसिया और कहाँ होगा
इश्क की आग का धुआँ जहाँ होगा
पीड़ा पाले ग़म सहलाए
कैसे-कैसे जी बहलाए
बावरा है, भला मना कहाँ होगा…
रुखे-सूखे तिनके रखना
फूंकना और चिनगारियाँ चखना
भोगी है, जोगी ये, चैन कहाँ होगा…