Hindi Poetry

Gulzar – Dil ka rasiya aur kahan hoga


दिल का रसिया और कहाँ होगा
इश्क की आग का धुआँ जहाँ होगा

पीड़ा पाले ग़म सहलाए
कैसे-कैसे जी बहलाए
बावरा है, भला मना कहाँ होगा…

रुखे-सूखे तिनके रखना
फूंकना और चिनगारियाँ चखना
भोगी है, जोगी ये, चैन कहाँ होगा…