Hindi Poetry Gulzar – Kaanch ke khwaab December 11, 2020 rhymecloud कांच के ख्वाब देखो आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा देखना, सोच-समझकर ज़रा पाँव रखना जोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं कांच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में ख़्वाब टूटे न कोई, जाग न जायें देखो जाग जायेगा कोई ख़्वाब तो मर जायेगा