Hindi Poetry Gulzar – Shararat November 15, 2020 rhymecloud शरारत आओ तुमको उठा लूँ कंधों पर तुम उचककर शरीर होठों से चूम लेना चूम लेना ये चाँद का माथा आज की रात देखा ना तुमने कैसे झुक-झुक के कोहनियों के बल चाँद इतना करीब आया है