Hindi Poetry Gulzar – Aadat November 15, 2020 rhymecloud आदत सांस लेना भी कैसी आदत है जिए जाना भी क्या रवायत है कोई आहट नहीं बदन में कहीं कोई साया नहीं है आँखों में पावँ बेहिस हैं, चलते जाते हैं इक सफ़र है जो बहता रहता है कितने बरसों से कितनी सदियों से जिए जाते हैं, जिए जाते हैं आदतें भी अजीब होती हैं