Hindi Poetry

Atal Bihari Vajpayee – Pushp kantkon mein khilte hain


पुष्प कंटकों में खिलते हैं,
दीप अंधेरों में जलते हैं ।
आज नहीं , प्रह्लाद युगों से,
पीड़ाओं में ही पलते हैं ।

किन्तु यातनाओं के बल पर,
नहीं भावनाएँ रूकती हैं ।
चिता होलिका की जलती है,
अन्यायी कर ही मलते हैं ।