Gulzar – Nsheerudeen shah ke liye
नशीरुद्दीन शाह के लिये
इक अदाकार हूँ मैं!
मैं अदाकार हूँ ना
जीनी पड़ती है कई जिंदगियां एक हयाती में मुझे!
मेरा किरदार बदल जाता है , हर रोज ही सेट पर
मेरे हालात बदल जाते हैं
मेरा चेहरा भी बदल जाता है,
अफसाना-ओ-मंज़र के मुताबिक़
मेर आदात बदल जाती हैं।
और फिर दाग़ नहीं छूटते पहनी हुई पोशाकों के
खस्ता किरदारों का कुछ चूरा सा रह जाता है तह में
कोई नुकीला सा किरदार गुज़रता है रगों से
तो खराशों के निशाँ देर तलक रहते हैं दिल पर
ज़िन्दगी से ये उठाए हुए किरदार
खयाली भी नहीं हैं
कि उतर जाएँ वो पंखे की हवा से
स्याही रह जाती है सीने में,
अदीबों के लिखे जुमलों की
सीमीं परदे पे लिखी
साँस लेती हुई तहरीर नज़र आता हूँ
मैं अदाकार हूँ लेकिन
सिर्फ अदाकार नहीं
वक़्त की तस्वीर भी हूँ