Hindi Poetry

Atal Bihari Vajpayee – Haathon ki haldi hai peeli


हाथों की हल्दी है पीली,
पैरों की मेहँदी कुछ गीली
पलक झपकने से पहले ही
सपना टूट गया।

दीप बुझाया रची दिवाली,
लेकिन कटी न अमावस काली
व्यर्थ हुआ आह्वान,
स्वर्ण सवेरा रूठ गया,
सपना टूट गया।

नियति नटी की लीला न्यारी,
सब कुछ स्वाहा की तैयारी
अभी चला दो कदम कारवां,
साथी छूट गया,
सपना टूट गया।