Hindi Poetry

Atal Bihari Vajpayee – Mayanagri dekh li


मायानगरी देख ली,
इन्द्रजाल की रात;
आसमान को चूमती,
धरती की बारात;
धरती की बारात,
रूप का रंग निखरता;
रस का पारावार,
डूबता हृदय उबरता;
कह कैदी कविराय,
बिकाऊ यहां जिंदगी;
चमक-दमक में छिपी,
गरीबी और गन्दगी!