Ramdhari Singh Dinkar – Rajkumari aur baansuri
राजकुमारी और बाँसुरी राजमहल के वातायन पर बैठी राजकुमारी, कोई विह्वल बजा रहा था नीचे वंशी प्यारी। “बस, बस, रुको,
Read MorePunjabi, Hindi Poetry and Lyrics
राजकुमारी और बाँसुरी राजमहल के वातायन पर बैठी राजकुमारी, कोई विह्वल बजा रहा था नीचे वंशी प्यारी। “बस, बस, रुको,
Read Moreप्लेग सब देते गालियाँ, बताते औरत बला बुरी है, मर्दों की है प्लेग भयानक, विष में बुझी छुरी है। और
Read Moreकोयल कैसा होगा वह नन्दन-वन? सखि! जिसकी स्वर्ण-तटी से तू स्वर में भर-भर लाती मधुकण। कैसा होग वह नन्दन-वन? कुंकुम-रंजित
Read Moreमिथिला में शरत् किस स्वप्न-लोक से छवि उतरी? ऊपर निरभ्र नभ नील-नील, नीचे घन-विम्बित झील-झील। उत्तर किरीट पर कनक-किरण, पद-तल
Read Moreराजा-रानी राजा बसन्त, वर्षा ऋतुओं की रानी, लेकिन, दोनों की कितनी भिन्न कहानी ! राजा के मुख में हँसी, कंठ
Read Moreनिर्झरिणी मधु-यामिनी-अंचल-ओट में सोई थी बालिका-जूही उमंग-भरी; विधु-रंजित ओस-कणों से भरी थी बिछी वन-स्वप्न-सी दूब हरी; मृदु चाँदनी-बीच थी खेल
Read Moreकिस शह्र न शोहरा हुआ नादानी-ए-दिल का किस शह्र न शोहरा हुआ नादानी-ए-दिल का किस पर न खुला राज़ परीशानी-ए-दिल
Read Moreएक दकनी ग़ज़ल कुछ पहले इन आँखों आगे क्या-क्या न नज़ारा गुज़रे था क्या रौशन हो जाती थी गली जब
Read Moreमिथिला मैं पतझड़ की कोयल उदास, बिखरे वैभव की रानी हूँ मैं हरी-भरी हिम-शैल-तटी की विस्मृत स्वप्न-कहानी हूँ। अपनी माँ
Read Moreपटना जेल की दीवार से मृत्यु-भीत शत-लक्ष मानवों की करुणार्द्र पुकार! ढह पड़ना था तुम्हें अरी ! ओ पत्थर की
Read Moreन अब रकीब न नासेह न ग़मगुसार कोई न अब रकीब न नासेह न ग़मगुसार कोई तुम आशना थे तो
Read Moreनज़रे-हाफ़िज़ नासेहम गुफ़त बजुज़ ग़म चे हुनर दारद इश्क बिरो ऐ ख़्वाज़ा-ए-आकिल हुनर-ए-बेहतर अज़ीं कन्दे-दहन कुछ इससे ज़ियादा लुतफ़े-सुख़न कुछ
Read Moreबोधिसत्त्व सिमट विश्व-वेदना निखिल बज उठी करुण अन्तर में, देव ! हुंकरित हुआ कठिन युगधर्म तुम्हारे स्वर में । काँटों
Read Moreओ द्विधाग्रस्त शार्दूल ! बोल हिल रहा धरा का शीर्ण मूल, जल रहा दीप्त सारा खगोल, तू सोच रहा क्या
Read Moreसभी कुछ है तेरा दिया हुआ, सभी राहतें सभी कुलफतें सभी कुछ है तेरा दिया हुआ, सभी राहतें सभी कुलफतें
Read Moreसहल यूं राहे-ज़िन्दगी की है सहल यूं राहे-ज़िन्दगी की है हर कदम हमने आशिकी की है हमने दिल में सजा
Read Moreतांडव नाचो, हे नाचो, नटवर ! चन्द्रचूड़ ! त्रिनयन ! गंगाधर ! आदि-प्रलय ! अवढर ! शंकर! नाचो, हे नाचो,
Read Moreबागी (बोरस्टल जेल के शहीद यतीन्द्रनाथ दास की मृत्यु पर) निर्मम नाता तोड़ जगत का अमरपुरी की ओर चले, बन्धन-मुक्ति
Read Moreसितम सिखलाएगा रस्मे-वफ़ा ऐसे नहीं होता सितम सिखलाएगा रस्मे-वफ़ा ऐसे नहीं होता सनम दिखलाएँगे राहे-ख़ुदा ऐसे नहीं होता गिनो सब
Read Moreतुझे पुकारा है बेइरादा तुझे पुकारा है बेइरादा जो दिल दुखा है बहुत ज़ियादा नदीम हो तेरा हरफ़े-शीरीं तो रंग
Read Moreव्योम-कुंजों की परी अयि कल्पने व्योम-कुंजों की परी अयि कल्पने व्योम-कुंजों की परी अयि कल्पने ! भूमि को निज स्वर्ग
Read More