Ramdhari Singh Dinkar – Kasme devaay
कस्मै देवाय ? रच फूलों के गीत मनोहर. चित्रित कर लहरों के कम्पन, कविते ! तेरी विभव-पुरी में स्वर्गिक स्वप्न
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कस्मै देवाय ? रच फूलों के गीत मनोहर. चित्रित कर लहरों के कम्पन, कविते ! तेरी विभव-पुरी में स्वर्गिक स्वप्न
Read Moreवो बुतों ने डाले हैं वस्वसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया वो बुतों ने डाले हैं वस्वसे कि दिलों से
Read Moreमख़दूम की याद में-2 “याद का फिर कोई दरवाज़ा खुला आख़िरे-शब” दिल में बिख़री कोई ख़ुशबू-ए-क़बा आख़िरे-शब सुब्ह फूटी तो
Read Moreपाटलिपुत्र की गंगा से संध्या की इस मलिन सेज पर गंगे ! किस विषाद के संग, सिसक-सिसक कर सुला रही
Read Moreमंगल-आह्वान भावों के आवेग प्रबल मचा रहे उर में हलचल। कहते, उर के बाँध तोड़ स्वर-स्त्रोत्तों में बह-बह अनजान, तृण,
Read Moreयह मौसमे-गुल गर चे तरबख़ेज़ बहुत है यह मौसमे-गुल गर चे तरबख़ेज़ बहुत है अहवाले गुल-ओ-लाला ग़म-अँगेज़ बहुत है ख़ुश
Read Moreय’ किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया य’ किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया
Read Moreउमीदे-सहर की बात सुनो जिगर-दरीदा हूं, चाके-जिगर की बात सुनो अलम-रसीदा हूं, दामने-तर की बात सुनो ज़बां-बुरीदा हूं, ज़ख़्मे-गुलू से
Read Moreजिस रोज़ क़ज़ा आएगी किस तरह आएगी जिस रोज़ क़ज़ा आएगी शायद इस तरह कि जिस तौर कभी अव्वल शब
Read Moreअश्क आबाद की इक शाम जब सूरज ने जाते-जाते अश्क आबाद के नीले उफ़क से अपने सुनहरी जाम में ढाली
Read Moreमेरे दर्द को जो ज़बाँ मिले मेरा दर्द नग़मा-ए-बे-सदा मेरी ज़ात ज़र्रा-ए-बे-निशाँ मेरे दर्द को जो ज़बाँ मिले मुझे अपना
Read Moreपाँवों से लहू को धो डालो हम क्या करते किस रह चलते हर राह में कांटे बिखरे थे उन रिश्तों
Read Moreसज्जाद ज़हीर के नाम न अब हम साथ सैरे-गुल करेंगे न अब मिलकर सरे-मकत्ल चलेंगे हदीसे-दिलबरां बाहम करेंगे न ख़ूने-दिल
Read Moreऐ शाम मेहरबां हो ऐ शाम मेहरबां हो ऐ शाम-ए-शहर-ए-यारां हम पे मेहरबां हो दोज़ख़ी दोपहर सितम की बेसबब सितम
Read Moreगीत चलो फिर से मुस्कुराएं चलो फिर से दिल जलाएं जो गुज़र गई हैं रातें उनहें फिर जगा के लाएं
Read Moreहम तो मज़बूर थे इस दिल से हम तो मज़बूर थे इस दिल से कि जिसमें हर दम गरदिशे-ख़ूं से
Read Moreढाका से वापसी पर हम केः ठहरे अजनबी इतनी मदारातों के बाद फिर बनेंगे आशना कितनी मुलाक़ातों के बाद कब
Read Moreबहार आई बहार आई तो जैसे एक बार लौट आये हैं फिर अदम से वो ख़्वाब सारे, शबाब सारे जो
Read Moreकभी-कभी याद में उभरते हैं, नक़्शे-माज़ी मिटे-मिटे से कभी-कभी याद में उभरते हैं, नक़्शे-माज़ी मिटे-मिटे से वो आज़माइश दिलो-नज़र की,
Read Moreतुम अपनी करनी कर गुज़रो अब कयूं उस दिन का ज़िकर करो जब दिल टुकड़े हो जायेगा और सारे ग़म
Read Moreमोरी अरज सुनो (नज़र-ए-ख़ुसरो) “मोरी अरज सुनो दस्तगीर पीर” “माई री कहूं, कासे मैं अपने जिया की पीर” “नैया बांधो
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