Gulzar – Khabar hai
खबर है निज़ामे-जहाँ,पढ़ के देखो तो कुछ इस तरह चल रहा है! इराक़ और अमरीका की जंग छिड़ने के इमकान
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खबर है निज़ामे-जहाँ,पढ़ के देखो तो कुछ इस तरह चल रहा है! इराक़ और अमरीका की जंग छिड़ने के इमकान
Read Moreइक नज़्म ये राह बहुत आसान नहीं, जिस राह पे हाथ छुड़ा कर तुम यूँ तन तन्हा चल निकली हो
Read Moreअगर ऐसा भी हो सकता… अगर ऐसा भी हो सकता— तुम्हारी नींद में,सब ख़्वाब अपने मुंतकिल करके, तुम्हें वो सब
Read Moreनशीरुद्दीन शाह के लिये इक अदाकार हूँ मैं! मैं अदाकार हूँ ना जीनी पड़ती है कई जिंदगियां एक हयाती में
Read Moreकोहसार नुचे छीले गए कोहसार ने कोशिश तो की गिरते हुए इक पेड़ को रोकें, मगर कुछ लोग कंधे पर
Read Moreरुके रुके से क़दम रुक के बार बार चले रुके रुके से क़दम रुक के बार बार चले क़रार दे
Read Moreदेखो, आहिस्ता चलो देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना, ज़ोर से बज न
Read Moreखाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो? खाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो? एक ख़ामोश-सा जवाब तो है। डाक
Read Moreन आने की आहट न आने की आहट न जाने की टोह मिलती है कब आते हो कब जाते हो
Read Moreमेरा कुछ सामान (1) जब भी यह दिल उदास होता है जाने कौन आस-पास होता है होंठ चुपचाप बोलते हों
Read Moreजय हो जय हो, जय हो जय हो, जय हो आजा आजा जिंद शामियाने के तले, आजा ज़रीवाले नीले आसमान
Read Moreसपना रे सपना सपना रे सपना, है कोई अपना अंखियों में आ भर जा अंखियों की डिबिया, भर दे रे
Read Moreशाम से आज साँस भारी है शाम से आज साँस भारी है बे-क़रारी सी बे-क़रारी है आप के बा’द हर
Read Moreशाम से आँख में नमी सी है शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी
Read Moreरात मेरी दहलीज़ पर बैठी हुयी जानो पे सर रखे ये शब अफ़सोस करने आई है कि मेरे घर पे
Read Moreवारदात दो बजने में आठ मिनट थे– जब वह भारी बोरियों जैसी टांगों से बिल्डिंग की छत पर पहुँचा था
Read Moreखुश आमदेद और अचानक — तेज हवा के झोंके ने कमरे में आ कर हलचल कर दी — परदे ने
Read Moreसिद्धार्थ की वापसी सिद्धार्थ की वापसी “कपिल अवस्तु” दूर नहीं है, कपिल नगर के बाहर जंगल, कुछ छिदरा छिदरा लगता
Read Moreवादी-ए-कश्मीर चल चलेंगे चार-चनारों से मिलेंगे है वादी-ए-कश्मीर बहारों से मिलेंगे तेरे ही पर्वतों पे तो फिरदौस रखा है आ
Read Moreरात तामीर करें इक रात चलो तामीर करें, ख़ामोशी के संगे-मरमर पर, हम तान के तारीकी सर पर, दो शम’ए
Read Moreस्केच याद है इक दिन मेरी मेज़ पे बैठे-बैठे सिगरेट की डिबिया पर तुमने एक स्केच बनाया था आकर देखो
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