Hindi Poetry

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Gulzar – Guzaarish

 गुज़ारिश मैंने रक्खी हुई हैं आँखों पर तेरी ग़मगीन-सी उदास आँखें जैसे गिरजे में रक्खी ख़ामोशी जैसे रहलों पे रक्खी

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