Gulzar – Libaas
लिबास मेरे कपड़ों में टंगा है तेरा ख़ुश-रंग लिबास! घर पे धोता हूँ हर बार उसे और सुखा के फिर
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लिबास मेरे कपड़ों में टंगा है तेरा ख़ुश-रंग लिबास! घर पे धोता हूँ हर बार उसे और सुखा के फिर
Read Moreलैंडस्केप-1 दूर सुनसान-से साहिल के क़रीब एक जवाँ पेड़ के पास उम्र के दर्द लिए वक़्त मटियाला दोशाला ओढ़े बूढ़ा-सा
Read Moreनज़्म-ख़लाओं में तैरते जज़ीरों पे ख़लाओं में तैरते जज़ीरों पे चम्पई धूप देख कैसे बरस रही है महीन कोहरा सिमट
Read Moreलैंडस्केप-2 कोई मेला लगा है परबत पर सब्ज़ाज़ारों पर चढ़ रहे हैं लोग टोलियाँ कुछ रुकी हुईं ढलानों पर दाग़
Read Moreघुटन जी में आता है कि इस कान में सुराख़ करूँ खींचकर दूसरी जानिब से निकालूँ उसको सारी की सारी
Read Moreगुज़ारिश मैंने रक्खी हुई हैं आँखों पर तेरी ग़मगीन-सी उदास आँखें जैसे गिरजे में रक्खी ख़ामोशी जैसे रहलों पे रक्खी
Read Moreकिताबें किताबें झांकती हैं बंद अलमारी के शीशों से बड़ी हसरत से तकती हैं महीनों अब मुलाकातें नहीं होती जो
Read Moreआईना-१ ये आइना बोलने लगा है, मैं जब गुजरता हूँ सीढ़ियों से, ये बातें करता है–आते जाते में पूछता है
Read Moreउलझन एक पशेमानी रहती है उलझन और गिरानी भी.. आओ फिर से लड़कर देंखें शायद इससे बेहतर कोई और सबब
Read Moreग़ालिब रात को अक्सर होता है,परवाने आकर, टेबल लैम्प के गिर्द इकट्ठे हो जाते हैं सुनते हैं,सर धुनते हैं सुन
Read Moreपंचम याद है बारिशों का दिन पंचम जब पहाड़ी के नीचे वादी में, धुंध से झाँक कर निकलती हुई, रेल
Read Moreवैनगॉग का एक खत तारपीन तेल में कुछ घोली हुयी धूप की डलियाँ, मैंने कैनवस पर बिखेरी थीं,—-मगर क्या करूं
Read Moreदेर आयद आठ ही बिलियन उम्र जमीं की होगी शायद ऐसा ही अंदाज़ा है कुछ ‘साइंस’ का चार अशारिया छः
Read Moreऐना कैरेनिना “वर्थ” जो सेंट है मिट्टी का “वर्थ” जो तुमको भला लगता है “वर्थ” के सेंट की खुश्बू थी
Read Moreगुब्बारे इक सन्नाटा भरा हुआ था, एक गुब्बारे से कमरे में, तेरे फोन की घंटी के बजने से पहले। बासी
Read Moreबौछार मैं कुछ-कुछ भूलता जाता हूँ अब तुझको, तेरा चेहरा भी अब धुँधलाने लगा है अब तखय्युल में, बदलने लग
Read Moreदो सोंधे-सोंधे जिस्म दो सोंधे-सोंधे जिस्म जिस वक़्त एक मुट्ठी में सो रहे थे लबों की मद्धम तवील सरगोशियों में
Read Moreजाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया उम्र भर दोहराऊँगा ऐसी कहानी दे गया उससे मैं कुछ पा सकूँ
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