Faiz Ahmed Faiz – Gham na kar, gham na kar
ग़म न कर, ग़म न कर दर्द थम जाएगा, ग़म न कर, ग़म न कर यार लौट आएंगे, दिल ठहर
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ग़म न कर, ग़म न कर दर्द थम जाएगा, ग़म न कर, ग़म न कर यार लौट आएंगे, दिल ठहर
Read Moreलहू का सुराग़ कहीं नहीं है, कहीं भी नहीं लहू का सुराग़ न दस्तो-नाख़ुने-कातिल न आसतीं पे निशां न सुरख़ी-ए-लब-ए-ख़ंजर,
Read Moreइंतिसाब आज के नाम और आज के ग़म के नाम आज का ग़म कि है ज़िन्दगी के भरे गुलसितां से
Read Moreक़ैदे-तनहाई दूर आफ़ाक पे लहराई कोई नूर की लहर ख़्वाब ही ख़्वाब में बेदार हुआ दर्द का शहर ख़्वाब ही
Read Moreकहाँ जाओगे और कुछ देर में लुट जायेगा हर बाम पे चांद अकस खो जायेंगे आईने तरस जायेंगे अरश के
Read Moreदो मर्सिए १. मुलाकात मिरी सारी दीवार सियह हो गई ता हलका-ए-बाम रासते बुझ गये, रुख़सत हुए रहगीर तमाम अपनी
Read Moreशह्रे-याराँ आसमां की गोद में दम तोड़ता है तिफ़ले-अबर जम रहा है अबर के होठों पे ख़ूं-आलूद कफ़ बुझते-बुझते बुझ
Read Moreशाम इस तरह है कि हर इक पेड़ कोई मन्दिर है कोई उजड़ा हुआ, बे-नूर पुराना मन्दिर ढूंढता है जो
Read Moreजश्न का दिन जुनूं की याद मनायो कि जश्न का दिन है सलीब-ओ-दार सजायो कि जश्न का दिन है तरब
Read Moreसफ़रनामा पेकिंग यूं गुमां होता है बाजू हैं मिरे साठ करोड़ और आफ़ाक की हद तक मिरे तन की हद
Read Moreसरे-आग़ाज़ शायद कभी अफ़्शा हो निगाहों पे तुम्हारी हर सादा वरक़ जिस सुख़न-ए-कुश्ता से ख़ूँ है शायद कभी इत गीत
Read Moreअगस्त १९५५ शहर में चाक-गरेबाँ हुए नापैद अबके कोई करता ही नहीं ज़ब्त की ताकीद अबके लुत्फ़ कर, ऐ निगहे-यार,
Read Moreबुनियाद कुछ तो हो (कव्वाली) कू-ए-सितम की ख़ामुशी आबाद कुछ तो हो कुछ तो कहो सितमकशो फ़रियाद कुछ तो हो
Read Moreदरीचा गड़ी हैं कितनी सलीबें मिरे दरीचे में हरेक अपने मसीहा के ख़ूं का रंग लिये हरेक वसले-ख़ुदावन्द की उमंग
Read Moreवासोख़्त सच है, हमीं को आपके शिकवे बजा न थे बेशक, सितम जनाब के सब दोस्ताना थे हाँ, जो जफ़ा
Read Moreमुलाक़ात 1 यह रात उस दर्द का शजर है जो मुझसे तुझसे अज़ीमतर है अज़ीमतर है कि उसकी शाख़ों में
Read Moreदिलदार देखना तूफ़ां-ब-दिल है हर कोई दिलदार देखना गुल हो न जाये मशअले-रुख़सार देखना आतिश-ब-जां है न कोई सरकार देखना
Read Moreहार्ट अटैक (रुख़सत) दर्द इतना था कि उस रात दिले-वहशी ने हर रगे-जां से उलझना चाहा हर बुने-मू से टपकना
Read Moreग़म-ब-दिल, शुक्र-ब-लब, मस्तो-ग़ज़लख़्वाँ चलिए ग़म-ब-दिल, शुक्र-ब-लब, मस्तो-ग़ज़लख़्वाँ चलिए जब तलक साथ तेरे उम्रे-गुरेज़ां चलिए रहमते-हक से जो इस सम्त कभी
Read Moreहैराँ हैं जबीं आज किधर सज्दा रवाँ है हैरां है जबीं आज किधर सजदा रवां है सर पर हैं खुदावन्द,
Read Moreहमीं से अपनी नवा हमकलाम होती रही हमीं से अपनी नवा हमकलाम होती रही ये तेग़ अपने लहू में नियाम
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