Hindi Poetry Faiz Ahmed Faiz – Baali pe kahein raat dhal rahi hai December 17, 2023 rhymecloud बालीं पे कहीं रात ढल रही है बालीं पे कहीं रात ढल रही है या शम्अ पिघल रही है पहलू में कोई चीज़ जल रही है तुम हो कि मेरी जान निकल रही है (बालीं पे=सिरहाने की ओर,सिर की ओर)