Faiz Ahmed Faiz – Dildaar dekhna
दिलदार देखना
तूफ़ां-ब-दिल है हर कोई दिलदार देखना
गुल हो न जाये मशअले-रुख़सार देखना
आतिश-ब-जां है न कोई सरकार देखना
लौ के उठे न तुररा-ए-तररार देखना
जज़बे-मुसाफ़िराने-रहे-यार देखना
सर देखना, न संग न दीवार देखना
कूए-जफ़ा में कहते-ख़रीदार देखना
हम आ गये तो गरमीए-बाज़ार देखना
उस दिलनवाज़े-शहर के अतवार देखना,
बेइलतिफ़ात बोलना, बेज़ार देखना
ख़ाली हैं गरचे मसनदो-मिम्बर, निगूं ख़लक
रूआबे-कबा व हयबते-दस्तार देखना
जब तक नसीब था तिरा दीदार देखना
जिस सिमत देखना गुलो-गुलज़ार देखना
हम फिर तमीज़े-रोज़ो-महो-साल कर सके
ऐ यादे-यार फिर इधर इक बार देखना
१९६७
(तुररा-ए-तररार=जेबकतरा, कहते-ख़रीदार=
ख़रीदारों का अकाल, अतवार=ढंग, बेइलतिफ़ात=
बेध्यानी से, निगूं=झुका, रूआबे-कबा=पोशाक
का रोअब, हयबते-दस्तार=पगड़ी का डर)
ख़रीदारों का अकाल, अतवार=ढंग, बेइलतिफ़ात=
बेध्यानी से, निगूं=झुका, रूआबे-कबा=पोशाक
का रोअब, हयबते-दस्तार=पगड़ी का डर)