Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Humne shab sher mein sanwaare the


हमने सब शे’र में सँवारे थे

हमने सब शे’र में सँवारे थे
हमसे जितने सुख़न तुम्हारे थे

रंगों ख़ुश्बू के, हुस्नो-ख़ूबी के
तुमसे थे जितने इस्तिआरे थे

तेरे क़ौलो-क़रार से पहले
अपने कुछ और भी सहारे थे

जब वो लालो-गुहर हिसाब किए
जो तरे ग़म ने दिल पे वारे थे

मेरे दामन में आ गिरे सारे
जितने तश्ते-फ़लक में तारे थे

उम्रे-जावेद की दुआ करते थे
‘फ़ैज़’ इतने वो कब हमारे थे

(इस्तिआरे=रूपक, लालो-गुहर=
हीरे-मोती, तश्ते-फ़लक=आसमान
की तश्तरी, उम्रे-जावेद=उम्रदराज़)