Hindi Poetry Faiz Ahmed Faiz – Jeene ke liye marna June 6, 2022 rhymecloud जीने के लिए मरना जीने के लिए मरना ये कैसी सआदत है मरने के लिए जीना ये कैसी हिमाकत है अकेले जियो एक शमशाद तन की तरह और मिलकर जियो एक बन की तरह हमने उमीद के सहारे टूटकर यूं ही ज़िन्दगी की है जिस तरह तुमने आशिकी की है (सआदत=नूर, शमशाद=सरू)