Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Jeene ke liye marna


जीने के लिए मरना

जीने के लिए मरना
ये कैसी सआदत है
मरने के लिए जीना
ये कैसी हिमाकत है

अकेले जियो
एक शमशाद तन की तरह
और मिलकर जियो
एक बन की तरह

हमने उमीद के सहारे
टूटकर यूं ही ज़िन्दगी की है
जिस तरह तुमने आशिकी की है

(सआदत=नूर, शमशाद=सरू)