Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Nazar-e-haafiz


नज़रे-हाफ़िज़

नासेहम गुफ़त बजुज़ ग़म चे हुनर दारद इश्क
बिरो ऐ ख़्वाज़ा-ए-आकिल हुनर-ए-बेहतर अज़ीं

कन्दे-दहन कुछ इससे ज़ियादा
लुतफ़े-सुख़न कुछ इससे ज़ियादा

फ़सले-ख़िज़ां में मुशके-बहारां
बरगे-समन कुछ इससे ज़ियादा

हाले-चमन पर तलख़े-नवाई
मुरग़े-चमन कुछ इससे ज़ियादा

दिलशिकनी भी, दिलदारी भी
यादे-वतन कुछ इससे ज़ियादा

शम्म-ए-बदन, फ़ानूसे-कबा में
ख़ूबी-ए-तन कुछ इससे ज़ियादा

इश्क में क्या है ग़म के अलावा
ख़्वाजा-ए-मन कुछ इससे ज़ियादा

(नासेहम गुफ्त..बेहतर अज़ीं=मुझे
नसीहत करने वाले ने कहा कि इश्क
में बिना दुख के और क्या रखा है। हे
अक्लमंद, भला यह बताओ कि इस से
बड़ी अच्छाई और क्या है, कन्दे-दहन=
मुँह की मिठास, बरगे-समन=चमेली का
पत्ता, तलख़े-नवाई कौड़ी बात कहना, मुर्गे-
चमन=बाग़ के पक्षी, फ़ानूसे-कबा=कपड़े
का फानूस, ख़्वाजा-ए-मन=हे मेरे मालिक)